Ondu Bola | भारत संस्कारों की जननी
Follow Us         

औंदू बोला


मैंने एक सपना देखा है,

तुम दिल्ली जाने वाले हो,

किसी बड़े होटल में जाकर,

रसगुल्ले खाने वाले हो।


मैंने सपने में देखा है,

लल्लूजी फिर फेल हो गये,

इसी ख़ुशी में ओले बरसे,

बाहर रेलम ठेल हो गये।


मैंने सपने में देखा है,

मुन्नी की अम्मा आई है,

चाकलेट के पूरे पेकिट,

अपने साथ पाँच लाई है।


मैंने सपने में देखा है,

तुमने डुबकी एक लगाई,

और नदी में कूद-कूद कर,

उछल-उछल कर धूम मचाई।

मैंने सपने में देखा है,

तुम मेले में घूम रहे हो,

अच्छे-अच्छे फुग्गे लेकर,

बड़े मज़े से चूम रहे हो।


मैंने सपने में देखा है,

तुम बल्ले से खेल रहे हो

चौके वाली गेंद दौड़कर,

कूद-कूद कर झेल रहे हो।


मैंने सपने में देखा है,

भ्रष्टाचार समापन पर है,

बेईमानी सब हवा हो गई,

सच्चाई सिंहासन पर है।


औंदू बोला दादाजी से,

यों इतनी गप्पें देते हो,

किसी किराने की दुकान से,

चाकलेट क्यों न लेते हो।

आपको यह पोस्ट पसंद आया हो तो इस पेज को ज़रूर लाइक करें और नीचे दिए गए बटन दबा कर शेयर भी कर सकते हैं
औंदू बोला
   1059   0

अगला पोस्ट देखें
एक ज़रा सा बच्चा
   1079   0

Comments

Write a Comment


Name*
Email
Write your Comment
बर्र और बालक
- Ramdhari Singh Dinkar
   1014   0
ग़लती नहीं करूँगी
- Prabhudayal Shrivastav
   1092   0
चूँ चूँ चूँ चूँ म्याऊँ म्याऊँ
- Ayodhya Singh Upadhyay
   1208   0
ऊँट गाड़ी
- Harivansh Rai Bachchan
   1036   0
चिड़िया
- Trilok Singh Thakurela
   1525   0
चुहिया और संपादक‌
- Prabhudayal Shrivastav
   1074   0
अम्मू भाई
- Prabhudayal Shrivastav
   1063   0
उपवन के फूल
- Trilok Singh Thakurela
   1373   0
मीठी बातें
- Trilok Singh Thakurela
   1087   0
रक्षाबंधन की बहनों के लिए कविता
- Mr. Rhymer
   1273   0
गाय सलोनी
- Prabhudayal Shrivastav
   997   0
खिलौनेवाला
- Subhadra Kumari Chauhan
   1104   0
कुबेर धन प्राप्ति मंत्र
- Anonymous
   1   0
By visitng this website your accept to our terms and privacy policy for using this website.
Copyright 2026 Bharat Sanskaron Ki Janani - All Rights Reserved. A product of Anukampa Infotech.
../